(नितेन्द्र झां)
#महोबा उत्तरप्रदेश में एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। रेलवे से वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हुए 70 वर्षीय ओम प्रकाश राठौर और उनकी 27 वर्षीय बेटी रश्मि को उनके ही घर में पांच वर्षों तक कैद, भूख और अमानवीय यातनाओं का शिकार बनाया गया।
ओम प्रकाश की पत्नी का वर्ष 2016 में निधन हो गया था। इसके बाद देखभाल के नाम पर उन्होंने राम प्रकाश कुशवाहा और उसकी पत्नी रामदेवी को घर में रखा। लेकिन भरोसे का यही रिश्ता धीरे-धीरे खौफनाक साजिश में बदल गया। नौकर दंपति ने ओम प्रकाश की संपत्ति पर नजर गड़ाई और चालाकी से पूरे घर पर कब्जा कर लिया।
आरोप है कि दोनों ने पिता-पुत्री को अलग-अलग कमरों में बंद कर दिया। बीते पांच वर्षों तक ओम प्रकाश और रश्मि कैद में रहे। खाने-पीने, इलाज और इंसानी गरिमा तक से उन्हें वंचित कर दिया गया। कोई मिलने आता तो नौकर राम प्रकाश यह कहकर टाल देता कि “साहब बाहर गए हैं।”
इस अमानवीय कैद का अंत ओम प्रकाश राठौर की मौत के साथ हुआ। मौत के बाद जब घर का दरवाजा खुला तो अंदर का मंजर देख हर कोई सन्न रह गया। ओम प्रकाश की मौत भूख, कैद, प्रताड़ना और इलाज न मिलने के कारण बताई जा रही है।
सबसे भयावह दृश्य उनकी बेटी रश्मि का था। 27 साल की रश्मि कंकाल जैसी हालत में मिली — मानो उम्र नहीं, बल्कि यातनाएं उसकी पहचान बन गई हों। शरीर पर मांस नहीं, कपड़े तक नहीं, बस किसी तरह चलती हुई सांसें। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखें भर आईं।
घटना उजागर होते ही नौकर दंपति फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दोनों आरोपियों की तलाश जारी है।




