best news portal development company in india

महोबा को जिला बनाने के सूत्रधार थे पूर्व विधायक अरिमर्दन सिंह नाना

SHARE:

सूर्य महोत्सव में मुख्य अतिथि बनाए जाने की मांग तेज

#महोबा (नितेन्द्र झां) बुंदेलखंड के छोटे से शहर महोबा को जनपद और फिर पूर्ण जिला का दर्जा दिलाने में पूर्व विधायक आदरणीय अरिमर्दन सिंह “नाना” की ऐतिहासिक भूमिका रही है। एडवोकेट आशीष विश्वकर्मा ने मांग उठाई है कि 11 से 17 फरवरी तक आयोजित होने वाले सूर्य महोत्सव में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाए, क्योंकि महोबा के अस्तित्व और पहचान से उनका नाम गहराई से जुड़ा हुआ है।
अरिमर्दन सिंह “नाना” का नाम महोबा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। 11 फरवरी 1995 को महोबा को जिला बनाने का निर्णय तत्कालीन विधायक अरिमर्दन सिंह की दृढ़ राजनीतिक जिद और संघर्ष का परिणाम माना जाता है। उस समय महोबा जिला बनने के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता था, लेकिन नाना के अडिग रुख के सामने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को झुकना पड़ा और उत्तर प्रदेश के सबसे छोटे जिले के रूप में महोबा की घोषणा करनी पड़ी।

एडवोकेट आशीष विश्वकर्मा बताते हैं कि यह निर्णय इतना नाटकीय था कि मुलायम सिंह यादव को महोबा के पहले जिलाधिकारी उमेश सिन्हा को अपने हेलीकॉप्टर में बैठाकर यहां लाना पड़ा। आजादी के बाद वीर शिरोमणि आल्हा-ऊदल की धरती महोबा से जितने भी विधायक चुने गए, उनमें से कोई भी अरिमर्दन सिंह जैसा ऐतिहासिक योगदान नहीं दे पाया।
81 वर्षीय अरिमर्दन सिंह वर्तमान राजनीतिक हालात से संतुष्ट नहीं दिखते। उनका मानना है कि महोबा को जिला बने 31 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है और इसके लिए वर्तमान जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं।
महोबा के जिला बनने की कहानी भी राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी हुई है। जनवरी 1995 में मायावती द्वारा मुलायम सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद सरकार अल्पमत में आ गई थी। मुलायम सिंह यादव को अपनी सरकार बचाने के लिए एक विधायक की जरूरत थी। उन्होंने अरिमर्दन सिंह को मंत्री पद का प्रस्ताव दिया, लेकिन नाना ने निजी लाभ ठुकराकर महोबा को जिला बनाने की शर्त रखी। अंततः सरकार बचाने के लिए मुलायम सिंह यादव को यह मांग स्वीकार करनी पड़ी।
आज महोबा में डीएम, एसपी, जिला न्यायालय और सभी प्रमुख विभाग मौजूद हैं, जिससे लोगों को छोटे कामों के लिए हमीरपुर जाने की मजबूरी खत्म हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस उपलब्धि का श्रेय पूरी तरह अरिमर्दन सिंह “नाना” को जाता है।

Nitendra Jha
Author: Nitendra Jha

Leave a Comment