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महाशिवरात्रि 2026: केवल परंपरा नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का महापर्व; जानें इसका आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

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हमीरपुर/१३/०२/२०२६/महाशिवरात्रि का पर्व भारत के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। भगवान शिव के भक्त इस दिन को महादेव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाते हैं। हमीरपुर में अनेक शिव मंदिर हैं जिसमे से प्रमुख हमीरपुर का संगमेश्वर, राठ का चौपरा शिव मंदिर, कुरारा क्षेत्र के बेरी के कोटेश्वर मंदिर में शिव बारात का आयोजन होता है, निन्नी शिव मंदिर, शंकरपुर का प्रसिद्ध शिव मंदिर जहां मेले का आयोजन होता है जिसमें हजारों की संख्या में शिव भक्त सम्मलित होते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इस दिन प्रकृति और ब्रह्मांड में कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जिनका सीधा संबंध हमारे शरीर और मस्तिष्क से है?

1. आध्यात्मिक दृष्टिकोण: ‘शिव’ यानी शून्य

अध्यात्म में ‘शिव’ का अर्थ है ‘वह जो नहीं है’ या ‘शून्य’।
* शिव और शक्ति का मिलन: महाशिवरात्रि को पुरुष (शिव) और प्रकृति (शक्ति) के मिलन की रात माना जाता है।
* मुक्ति का मार्ग: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात किया गया जप और ध्यान साधक को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। शिव को ‘आदियोगी’ कहा जाता है, जिन्होंने इसी दिन योग विद्या को पूर्णता प्रदान की थी।

2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण: रीढ़ की हड्डी और ऊर्जा का प्रवाह

आधुनिक विज्ञान और योग विज्ञान के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) एक विशिष्ट स्थिति में होता है।
* प्राकृतिक ऊर्जा का उभार: इस रात पृथ्वी पर ऊर्जा का प्रवाह प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर (Upward) होता है। मानव शरीर में रीढ़ की हड्डी (Spine) ऊर्जा का मुख्य मार्ग है।
* जागृत अवस्था का महत्व: वैज्ञानिकों और योगियों का मानना है कि यदि इस रात मनुष्य अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा (Vertical) रखकर जागता रहे, तो यह प्राकृतिक ऊर्जा उसके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मस्तिष्क को अत्यधिक लाभ पहुँचाती है। यही कारण है कि इस रात ‘जागरण’ करने की परंपरा है।

3. खगोलीय महत्व (Astronomical Significance)

महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। इस समय चंद्रमा की स्थिति क्षीण होती है, जिससे मन शांत और अंतर्मुखी होने के लिए तैयार रहता है। विज्ञान कहता है कि चंद्रमा का प्रभाव पृथ्वी के जल और मानव शरीर के तरल पदार्थों पर पड़ता है। इस रात की विशेष खगोलीय स्थिति मन को नियंत्रित करने और ध्यान में उतरने के लिए सबसे अनुकूल होती है।
कैसे मनाएं इस पर्व को?
* जागरण: रात भर अपनी रीढ़ सीधी रखकर ध्यान या कीर्तन में शामिल हों।
* उपवास: शरीर के शोधन (Detoxification) के लिए हल्का आहार या उपवास रखें।
* महामृत्युंजय मंत्र: इस मंत्र का उच्चारण वातावरण में सकारात्मक कंपन (Vibrations) पैदा करता है।
निष्कर्ष: महाशिवरात्रि हमें याद दिलाती है कि हम केवल भौतिक शरीर नहीं हैं, बल्कि उस अनंत ऊर्जा का हिस्सा हैं जिसे हम ‘शिव’ कहते हैं। चाहे आप इसे आस्था से जोड़ें या विज्ञान से, यह रात स्वयं को जानने और भीतर की ऊर्जा को जगाने का एक सुनहरा अवसर है।

IKV News
Author: IKV News

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