“बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं का दर्पण होना चाहिए”
लेख: संपादक (इंडिया खोज विचार)
उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना १०वां नवीनतम बजट पेश कर दिया है। यह बजट केवल सरकारी आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य के ‘ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ बनने के सपने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस बार के बजट में सरकार ने ‘विकास’ और ‘विरासत’ के मेल को साधने की कोशिश की है।
इंडिया खोज की नज़र से बजट के मुख्य बिंदु:
बजट में बुनियादी ढांचे (Infrastructure), एक्सप्रेसवे और औद्योगिक गलियारों पर दिया गया जोर सराहनीय है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकलकर निवेश का नया केंद्र बनना चाहता है। युवाओं के लिए स्वरोजगार की योजनाएं और शिक्षा के लिए आवंटित राशि भविष्य की नींव रखने वाली है।
विचारणीय पहलू:
लेकिन, ‘इंडिया खोज विचार’ का मानना है कि आंकड़ों की चमक के बीच हमें उन चेहरों को नहीं भूलना चाहिए जो खेत-खलिहानों में हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महंगाई पर नियंत्रण और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इन योजनाओं का लाभ पहुँचना ही इस बजट की असली सफलता होगी। बजट में घोषणाएं तो भव्य हैं, लेकिन उनका समयबद्ध क्रियान्वयन (Implementation) ही यह तय करेगा कि क्या यूपी वाकई उत्तम प्रदेश से ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष:
अंततः, एक बजट तभी क्रांतिकारी कहलाता है जब वह आम आदमी की जेब में राहत और उसके चेहरे पर मुस्कान लाए। उत्तर प्रदेश का यह बजट उम्मीदों का एक पुल तो है, पर इस पुल पर चलकर जनता को खुशहाली तक पहुँचाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।







