हमीरपुर में पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक, ओबीसी की 79 जातियों के प्रतिनिधित्व का होगा आकलन

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अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने जातिवार आंकड़ों के समुचित विश्लेषण के दिए निर्देश, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और आरक्षण के लाभों की भी होगी समीक्षा

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभागार, हमीरपुर में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्थानीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की 79 जातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग ने जातिवार उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाले वर्गों की पहचान करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में आयोग के सदस्य एवं सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. अरविन्द कुमार चौरसिया तथा सेवानिवृत्त आईएएस एस.पी. सिंह उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त जिला पंचायत अध्यक्ष जयंती राजपूत, मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी सुबोध जोशी, खंड विकास अधिकारीगण, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

79 जातियों के प्रतिनिधित्व की होगी समीक्षा

बैठक का प्रमुख विषय स्थानीय निकायों एवं पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग की विभिन्न जातियों की राजनीतिक भागीदारी का आकलन करना रहा। आयोग ने इस बात पर विचार किया कि आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत विभिन्न जातियों को प्रतिनिधित्व का लाभ किस सीमा तक मिल रहा है और किन जातियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है।

इस प्रक्रिया के तहत उपलब्ध जातिवार आंकड़ों का विश्लेषण कर उन वर्गों की स्थिति समझने पर जोर दिया गया, जिन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। आयोग का उद्देश्य तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर स्थिति का आकलन कर प्रतिनिधित्व से जुड़ी कमियों को स्पष्ट करना है।

सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन के कारणों पर चर्चा

समीक्षा बैठक में पिछड़ेपन की स्थिति को प्रभावित करने वाले विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक कारकों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसमें शिक्षा एवं जागरूकता की कमी, कृषि भूमि और अन्य संसाधनों की सीमित उपलब्धता, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों तक पहुंच तथा मादक पदार्थों के सेवन जैसी सामाजिक समस्याओं के संभावित प्रभावों का अध्ययन किए जाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

आयोग ने इस बात पर बल दिया कि केवल उपलब्ध आंकड़ों के संकलन तक सीमित न रहकर विभिन्न जातियों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को भी समझा जाए, ताकि उनकी वास्तविक स्थिति का समुचित मूल्यांकन किया जा सके।

न्यायिक निर्देशों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होगा अध्ययन

स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संबंध में लागू संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप अध्ययन किए जाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। इस संदर्भ में के. कृष्णमूर्ति, सुरेश महाजन तथा वी.के. राव गवली से संबंधित न्यायिक मामलों और आदेशों का उल्लेख किया गया। आयोग ने आरक्षण एवं प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों का परीक्षण प्रासंगिक विधिक प्रावधानों और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप किए जाने पर जोर दिया।

जातिवार आंकड़ों के पूर्ण उपयोग के निर्देश

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि जनपद की विभिन्न जातियों के संबंध में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का समुचित एवं पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। आंकड़ों के विश्लेषण में किसी भी प्रासंगिक तथ्य की अनदेखी न हो और जातिवार सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति का आकलन उपलब्ध अभिलेखों तथा संबंधित सूचनाओं के आधार पर किया जाए।

बैठक में जनप्रतिनिधियों से भी विभिन्न क्षेत्रों में अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों की संख्या, उनकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व की स्थिति के संबंध में सुझाव लिए गए। आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था को यथावत बनाए रखने अथवा उसमें आवश्यक बदलाव किए जाने से संबंधित विचार भी संकलित किए गए।

सुझावों और आंकड़ों के आधार पर तैयार होगी रिपोर्ट

बैठक में प्राप्त सुझावों एवं उपलब्ध आंकड़ों को समेकित कर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शासन को भेजने के संबंध में चर्चा की गई। आयोग की समीक्षा का उद्देश्य स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग की विभिन्न जातियों के प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति को समझना, सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के कारणों का आकलन करना तथा संवैधानिक प्रावधानों और प्रासंगिक न्यायिक निर्देशों के अनुरूप आवश्यक अध्ययन सुनिश्चित करना है।

IKV News
Author: IKV News

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