नितेन्द्र झां
#महोबा : बुंदेलखंड क्षेत्र प्रकृति प्रदत अकूत वन सम्पदा क़े साथ साथ में हीरा,युरेनियम, जिग्नेजियम, गौरा पत्थर ग्रेनाईट,बालू,सजर, चूना पत्थर, लाल मोरम,सहित अन्य बहुत सारे माइंस और मिनरल्स क़े अकूत भंडार हैं, जिस पर वैध के साथ अवैध खनन से बड़ी आय सत्तासीन एवम भ्रष्ट अधिकारीयों को होती हैं, पृथक राज्य होने से निरंकुश अधिकारीयों एवं खनन माफियाओ का नियंत्रण नहीं रहेगा. इसलिए बुंदेलखंड स्वतंत्र राज्य नहीं बनाया जा रहा,,
क्या आपको पता हैं आजादी के बाद ‘बुंदेलखंड राज्य’ का गठन हुआ था
भारत के आजाद होने के बाद,मार्च 1948 में बुंदेलखंड और बघेलखंड की इन सभी रियासतों को मिलाकर #विंध्य_प्रदेश’ नाम का एक नया राज्य बनाया गया, जिसकी राजधानी रीवा थी।
विंध्य प्रदेश के अंतर्गत आने वाले बुंदेलखंड के हिस्से को लोग आम बोलचाल में ‘बुंदेलखंड राज्य’कहते थे ।
1 नवंबर 1956 को जब राज्यों का पुनर्गठन हुआ, तब विंध्य प्रदेश को समाप्त कर दिया गया। बुंदेलखंड को दो भागों में बांटकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों में मिला दिया गया, जो व्यवस्था आज भी लागू है।
गौरवशाली समृद्ध बुंदेलखंड क्षेत्र कई छोटी-बड़ी रियासतों और जागीरों में बंटा हुआ एक पूरा भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्र था। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान, इन सभी रियासतों पर नियंत्रण रखने और प्रशासनिक कामकाज देखने के लिए अंग्रेजों ने ‘बुंदेलखंड एजेंसी’का गठन किया था। बुंदेलखंड क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति कुछ इस तरह थी:उस वक्त की बुंदेलखंड की प्रमुख रियासतें आजादी से पहले इस क्षेत्र में कई प्रसिद्ध स्वतंत्र रियासतें थीं, जिनके अपने राजा और नवाब हुआ करते थे: ओरछा रियासत (सबसे पुरानी और प्रमुख बुंदेला रियासत),पन्ना रियासत ,दतिया रियासत, छतरपुर रियासत ,अजयगढ़ रियासत,चरखारी, बिजावर,और समथर, रियासतें, इसके अलावा झाँसी और जैतपुर जैसी कुछ रियासतों को अंग्रेजों ने आजादी से बहुत पहले ही (हड़प नीति या ‘डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ के तहत) अपने सीधे नियंत्रण वाले ब्रिटिश भारत का हिस्सा बना लिया था।
बुंदेलखंड में प्रकृति प्रदत अकूत वन सम्पदा क़े साथ साथ हीरा,युरेनियम, जिग्नेजियम, गौरा पत्थर ग्रेनाईट,बालू,सजर मोरम,सहित अन्य बहुत सारे माइंस और मिनरल्स का अकूत भंडार हैं, जिस पर सत्ताओ की नजर होने से बुंदेलखंड स्वतंत्र राज्य नहीं बनाया जा रहा,,बुंदेलखंड ऐतिहासिक सामाजिक धार्मिक और आर्थिक रूप से परिलाक्षित भौगोलिक रूप से मजबूत बुंदेलखंड में पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं। पृथक बुंदेलखंड राज्य समृद्ध बुंदेलखंड राज्य सावित होगा.








