6 नवंबर को मनाई जाएगी धनतेरस, शाम को प्रदोष काल में होगी भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा; जानिए शास्त्रीय मान्यता, पूजा की विधि और इसके पीछे छिपा वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विशेष रिपोर्ट | IKV NEWS
नई दिल्ली/हमीरपुर। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का शुभारंभ धनतेरस से होता है। सामान्य तौर पर धनतेरस को सोना, चांदी, बर्तन और अन्य कीमती वस्तुएं खरीदने का दिन माना जाता है, लेकिन भारतीय परंपरा में इस पर्व का महत्व इससे कहीं अधिक व्यापक है। इसका वास्तविक संदेश केवल धन-संपत्ति अर्जित करना नहीं, बल्कि आरोग्य, सदाचार, श्रम, स्वच्छता, पारिवारिक सुरक्षा और जीवन में संतुलित समृद्धि को महत्व देना है।
धनतेरस को शास्त्रीय नाम धनत्रयोदशी कहा जाता है। ‘धन’ का अर्थ समृद्धि और ‘त्रयोदशी’ का अर्थ चंद्र मास के कृष्ण अथवा शुक्ल पक्ष की तेरहवीं तिथि है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाए जाने वाले इस पर्व का संबंध भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य, आयुर्वेद, समुद्र मंथन की पौराणिक कथा, माता लक्ष्मी की उपासना और यमदीपदान से जुड़ा हुआ है।
भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य और धनतेरस का वास्तविक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें देवताओं का वैद्य और आयुर्वेद का अधिष्ठाता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती अथवा धन्वंतरि त्रयोदशी के रूप में भी मनाया जाता है।
भगवान धन्वंतरि का अमृत कलश लेकर प्रकट होना केवल अमरत्व की पौराणिक कल्पना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारतीय परंपरा में स्वास्थ्य, जीवन की रक्षा और रोगों से मुक्ति की कामना के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
आयुर्वेद का मूल उद्देश्य केवल रोग होने पर उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है। आयुर्वेद का प्रसिद्ध सिद्धांत है— ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनम्।’ अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग का शमन करना।
इस दृष्टि से धनतेरस का पहला और सबसे महत्वपूर्ण संदेश है कि स्वास्थ्य ही मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है।
क्या धनतेरस वास्तव में केवल खरीदारी का पर्व है?
समय के साथ धनतेरस पर सोना, चांदी, पीतल, तांबा, स्टील और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदने की परंपरा लोकप्रिय हुई है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक बनती है।
हालांकि धनतेरस का अर्थ केवल महंगी वस्तुओं की खरीदारी करना नहीं है। भारतीय परंपरा में लक्ष्मी का संबंध धन के साथ-साथ अन्न, ऐश्वर्य, सदाचार और जीवनोपयोगी संसाधनों से भी है।
भगवान कुबेर को धन का संरक्षक माना जाता है। इसलिए इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बहीखातों, तिजोरी, तराजू और व्यवसाय में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा करने की परंपरा भी है।
इसका व्यावहारिक संदेश यह है कि धन का अर्जन ईमानदारी से हो, उसका उपयोग उचित कार्यों में किया जाए और आर्थिक समृद्धि के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी निभाया जाए।
6 नवंबर 2026 को धनतेरस: तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। पंचांग गणना के अनुसार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को प्रातः लगभग 10:30 बजे प्रारंभ होकर 7 नवंबर को प्रातः लगभग 10:47 बजे तक रहेगी।
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर और आसपास के क्षेत्र के लिए स्थानीय सूर्यास्त एवं स्थिर वृषभ लग्न को ध्यान में रखते हुए पूजा का समय लगभग शाम 5:50 बजे से 7:48 बजे तक रखना उचित रहेगा। यह निकटवर्ती स्थानों की पंचांग गणना पर आधारित समय है; स्थानीय पंचांग में कुछ मिनटों का अंतर संभव है।
धनतेरस के प्रमुख समय:
- पर्व: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: प्रातः 10:30 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, प्रातः 10:47 बजे
- प्रदोष काल: सूर्यास्त के बाद का समय
- लक्ष्मी-कुबेर पूजन: लगभग शाम 5:50 से 7:48 बजे
- यमदीपदान: सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में
धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न का संयोग लक्ष्मी-कुबेर पूजन के लिए शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि पूजा का मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है। खरीदारी का मुहूर्त और पूजा का मुहूर्त भी अलग-अलग विषय हैं।
वैदिक परंपरा के अनुरूप धनतेरस की पूजा विधि
धनतेरस की पूजा में परिवार अपनी कुल परंपरा और क्षेत्रीय रीति का पालन करता है। प्रचलित पूजा-विधान के अनुसार निम्नलिखित क्रम अपनाया जा सकता है।
1. घर और पूजा स्थल की स्वच्छता
प्रातः घर, आंगन, मुख्य द्वार और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं तथा दीपक और पुष्पों से सजावट करें। पूजा के स्थान पर स्वच्छ चौकी बिछाकर लाल या पीला कपड़ा रखें।
2. भगवान धन्वंतरि का पूजन
भगवान धन्वंतरि का चित्र अथवा प्रतिमा स्थापित करें। जल, पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। आरोग्य एवं परिवार के स्वस्थ जीवन की प्रार्थना करें।
धन्वंतरि मंत्र:
‘ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलश हस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्रीमहाविष्णुस्वरूप श्रीधन्वन्तरिस्वरूप श्रीश्रीश्री औषधचक्र नारायणाय नमः।’
3. माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का पूजन
माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, फल, मिठाई और धूप-दीप अर्पित करें।
माता लक्ष्मी से घर में सुख, शांति, अन्न और धन की समृद्धि की प्रार्थना करें। भगवान कुबेर से धन के सदुपयोग और व्यवसाय में ईमानदारी बनाए रखने का संकल्प लें।
4. बहीखाता और व्यापारिक उपकरणों की पूजा
व्यापारी वर्ग इस दिन अपनी दुकान, प्रतिष्ठान, तिजोरी, बहीखाता, तराजू और व्यापार में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा करता है। नए बहीखाते पर शुभ-लाभ लिखकर नए आर्थिक वर्ष के लिए मंगलकामना की जाती है।
5. यमदीपदान
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाया जाता है। इसे यमदीपदान कहा जाता है।
इस परंपरा के पीछे परिवार के सदस्यों की दीर्घायु और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना जुड़ी हुई है।
6. आरती और प्रसाद वितरण
पूजा के अंत में माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की आरती करें। परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद वितरित करें तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता का संकल्प लें।
पूजा में दिखावे और अनावश्यक खर्च के बजाय श्रद्धा, स्वच्छता और सात्विकता को महत्व देना चाहिए।
धनतेरस का वैज्ञानिक पक्ष: स्वास्थ्य, स्वच्छता और आर्थिक अनुशासन
धनतेरस की परंपराओं को वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से समझने पर कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं।
1. स्वास्थ्य को संपत्ति मानने की अवधारणा
धन्वंतरि की उपासना का सबसे बड़ा संदेश स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को बेहतर जीवन के लिए आवश्यक मानता है।
आयुष मंत्रालय ने भी 4 नवंबर 2026 को धनतेरस के अवसर पर स्वस्थ जीवनशैली, निवारक स्वास्थ्य देखभाल, योग, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता देने की अपील की है।
2. घर की सफाई और स्वच्छ वातावरण
दीपावली से पहले घरों और आसपास के स्थानों की सफाई की परंपरा का व्यावहारिक महत्व है। साफ-सफाई से धूल, कचरा और कई प्रकार के संक्रमण के स्रोतों को कम करने में मदद मिलती है। स्वच्छ जल, साफ रसोई और खाद्य पदार्थों का सुरक्षित भंडारण परिवार के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
3. दीप प्रज्ज्वलन और प्रकाश का महत्व
दीपक जलाना अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। प्रकाश का मनुष्य की दिनचर्या और मानसिक वातावरण पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है कि दीपक जलाने मात्र से घर के रोगाणु समाप्त हो जाते हैं या बीमारियां दूर हो जाती हैं। इसलिए दीप प्रज्ज्वलन के साथ पर्याप्त वायु-संचार और अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है।
4. धातुओं और घरेलू उपयोग की वस्तुओं का महत्व
सोना और चांदी लंबे समय से मूल्यवान धातुओं के रूप में उपयोग किए जाते रहे हैं। वहीं तांबे और स्टील के बर्तनों का उपयोग घरेलू जीवन में व्यापक है। इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा को परिवार की उपयोगी वस्तुओं और घरेलू संसाधनों में निवेश के रूप में भी समझा जा सकता है। हालांकि किसी विशेष दिन धातु खरीदने से अपने आप आर्थिक लाभ बढ़ने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
5. आर्थिक अनुशासन और बचत
धनतेरस का एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश आर्थिक नियोजन भी है। आय के अनुसार खर्च करना, अनावश्यक कर्ज से बचना, बचत करना और भविष्य के लिए संसाधन सुरक्षित रखना परिवार की आर्थिक स्थिरता में मदद करता है।
इसलिए धनतेरस को केवल खरीदारी के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि जिम्मेदार आर्थिक व्यवहार की शुरुआत के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।
धनतेरस पर किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
- खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार करें, कर्ज लेकर दिखावे की खरीदारी न करें।
- सोना-चांदी खरीदते समय शुद्धता, हॉलमार्क और बिल अवश्य जांचें।
- खाद्य पदार्थों और मिठाइयों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें।
- दीपक सुरक्षित स्थान पर रखें और बच्चों को आग से दूर रखें।
- पटाखों एवं दीपों के धुएं से बचने के लिए वायु-संचार बनाए रखें।
- स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और जरूरत के अनुसार नियमित जांच कराएं।
- जरूरतमंदों की सहायता करें और धन का सदुपयोग करें।
धनतेरस का सबसे बड़ा संदेश
धनतेरस का वास्तविक संदेश है कि जीवन में धन आवश्यक है, लेकिन धन से भी अधिक मूल्यवान स्वास्थ्य, परिवार, सदाचार और संतोष हैं। भगवान धन्वंतरि की उपासना हमें आरोग्य का महत्व बताती है, माता लक्ष्मी की पूजा समृद्धि और सदुपयोग का संदेश देती है, जबकि कुबेर की आराधना धन के संरक्षण और अनुशासित प्रबंधन की प्रेरणा देती है।
इस प्रकार धनतेरस केवल खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि स्वस्थ परिवार, स्वच्छ समाज, ईमानदार व्यापार और संतुलित जीवन की भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का उत्सव है।
संदेश स्पष्ट है—धन कमाना सफलता हो सकती है, लेकिन स्वस्थ रहना और उस धन का सदुपयोग करना ही वास्तविक समृद्धि है।







