50 साल पुराना रामलीला प्रांगण कूड़े के ढेर में तब्दील, धमना में स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल

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सितंबर में होना है रामलीला का भव्य आयोजन, एक साल से रामलीला मंच पर जमा है कूड़ा; तालाब पर कथित कब्जे से भी अस्तित्व संकट में

हमीरपुर। राठ विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत धमना में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गांव का करीब 50 साल पुराना रामलीला प्रांगण पिछले एक वर्ष से कूड़े के ढेर में तब्दील बताया जा रहा है। जिस स्थान पर सितंबर माह में रामलीला का भव्य आयोजन होना है, वहां वर्तमान में गंदगी और कूड़े का अंबार लगा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते सफाई व्यवस्था महज कागजों तक सीमित होकर रह गई है।

ग्रामीणों के मुताबिक रामलीला प्रांगण गांव की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद लंबे समय से यहां सफाई न होने के कारण कूड़ा जमा होता चला गया। हालात यह हैं कि रामलीला मंच के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ऐसे में आगामी आयोजन को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।

कूड़े के ढेर और जलभराव से ग्रामीण परेशान

गांव के कई हिस्सों में कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियां और जलभराव की समस्या बताई जा रही है। महीनों से जलभराव के कारण सड़कें दलदल जैसी स्थिति में पहुंच गई हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जाम नालियों के कारण गंदा पानी सड़कों पर बहने और जगह-जगह जमा होने से संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी के नियमित रूप से गांव में न पहुंचने के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित है। शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

तालाब के अस्तित्व पर भी संकट

धमना में स्वच्छता के साथ-साथ गांव के तालाब को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब की भूमि पर कथित रूप से कब्जा किया गया है, जिससे तालाब लगातार सिमटता जा रहा है। बताया जाता है कि कुछ दिन पूर्व स्थानीय प्रशासन की टीम कथित कब्जे को हटाने के लिए मौके पर पहुंची थी और नाप-जोख भी की गई थी, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद भी कथित कब्जे पूरी तरह नहीं हटाए गए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब को समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसका अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है। वहीं, तालाब की स्थिति और कथित कब्जे को लेकर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के दावों पर उठे सवाल

एक ओर गांवों को स्वच्छ और जलभराव मुक्त बनाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर धमना में सामने आ रही स्थिति इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। रामलीला जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल का लंबे समय से कूड़ाघर बना रहना ग्राम पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि रामलीला प्रांगण की तत्काल सफाई कराई जाए, नालियों की सफाई और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए तथा तालाब की भूमि की दोबारा जांच कराकर यदि कोई अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे नियमानुसार हटाया जाए।

अब देखना यह है कि सितंबर में प्रस्तावित रामलीला आयोजन से पहले ग्राम पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी गांव की इन समस्याओं का कितना संज्ञान लेते हैं और धरातल पर कितनी कार्रवाई होती है।

IKV News
Author: IKV News

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