ताश के पत्तों पर दांव लगाना, जुए में पैसे गंवाना और नशे में त्योहार मनाना दीपावली की परंपरा नहीं; आइए, लक्ष्मी-गणेश पूजन, परिवार के प्रेम, सद्भाव और जरूरतमंदों की मदद से त्योहार की वास्तविक गरिमा को बनाए रखें।
हमीरपुर। दीपावली भारतीय संस्कृति का ऐसा पावन पर्व है, जो अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। यह पर्व घरों में दीप जलाने, मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की पूजा करने, परिवार के साथ खुशियां बांटने और समाज में प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारे को मजबूत करने का अवसर है। लेकिन समय के साथ त्योहारों के उत्साह के बीच कुछ ऐसी प्रवृत्तियां भी देखने को मिलती हैं, जो इनकी मूल भावना को कमजोर करती हैं। विशेष रूप से दीपावली के दौरान जुआ खेलने, शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों के सेवन और अनावश्यक दिखावे जैसी कुरीतियां समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
जुआ: कुछ घंटों का रोमांच, लंबे समय की परेशानी
दीपावली पर ताश खेलने के नाम पर पैसे का दांव लगाने और जुए को मनोरंजन बताने की प्रवृत्ति कई बार गंभीर आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं का कारण बन सकती है। शुरुआत में छोटी रकम से शुरू हुआ खेल कब लालच, हार की भरपाई और बड़ी रकम के दांव में बदल जाता है, इसका अंदाजा भी नहीं लग पाता। कई लोग अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक पैसा लगा देते हैं। हारने पर कर्ज, तनाव, पारिवारिक विवाद और मानसिक परेशानी जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
यह समझना जरूरी है कि जुआ न तो भाग्य आजमाने का सुरक्षित तरीका है और न ही दीपावली की कोई अनिवार्य परंपरा। त्योहार की खुशियां धन जीतने या हारने पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। परिवार और मित्रों के साथ बिना किसी आर्थिक दांव के मनोरंजक खेल खेलना और खुशियां बांटना ही स्वस्थ उत्सव का रूप है।
नशा खुशियां नहीं, परिवार की चिंता बढ़ाता है
दीपावली जैसे पावन अवसर पर शराब अथवा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करके उत्सव मनाने की प्रवृत्ति भी चिंताजनक है। नशे की हालत में व्यक्ति अपने व्यवहार और निर्णयों पर नियंत्रण खो सकता है। इससे सड़क दुर्घटनाओं, आपसी विवादों, घरेलू कलह और अन्य अप्रिय घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। त्योहार के दिन परिवार के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी ऐसे व्यवहार से प्रभावित होते हैं।
नशे को उत्सव का हिस्सा मानने के बजाय हमें अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझनी चाहिए। त्योहार वह अवसर है, जब घर के सभी सदस्य एक-दूसरे के साथ सुरक्षित और आनंदपूर्ण समय बिताएं, न कि किसी की लापरवाही के कारण घर का माहौल तनावपूर्ण हो।
दीपावली का असली अर्थ दूसरों के जीवन में उजाला फैलाना है
दीपावली की सार्थकता केवल घरों को रोशन करने और महंगे उपहार खरीदने में नहीं है। इसका वास्तविक संदेश है कि हम अपने जीवन से अज्ञान, अहंकार, लालच, द्वेष और बुराइयों के अंधकार को दूर करें। किसी गरीब परिवार को मिठाई देना, जरूरतमंद बच्चों के साथ खुशियां बांटना, बुजुर्गों का सम्मान करना, बेसहारा लोगों की मदद करना और स्थानीय कारीगरों से मिट्टी के दीपक खरीदना भी दीपावली को सार्थक बनाने के सुंदर तरीके हैं।
आज आवश्यकता है कि माता-पिता अपने बच्चों को त्योहारों के सांस्कृतिक और नैतिक महत्व से परिचित कराएं। युवा वर्ग भी अपनी ऊर्जा को नशे और जुए जैसी गतिविधियों में लगाने के बजाय शिक्षा, सामाजिक सेवा, रचनात्मक कार्यों और सकारात्मक मनोरंजन की ओर बढ़ाए।
समाज और प्रशासन की भी है महत्वपूर्ण भूमिका
जुआ और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकने के लिए केवल कानून और प्रशासन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। परिवार, सामाजिक संगठन, युवा मंडल, धार्मिक संस्थाएं और जागरूक नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। प्रशासन एवं पुलिस को भी त्योहारों के दौरान अवैध जुआ, सट्टेबाजी और नशे से जुड़ी गतिविधियों पर नियमानुसार प्रभावी निगरानी रखनी चाहिए तथा आमजन को जागरूक करना चाहिए।
समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह स्वयं ऐसी गतिविधियों से दूर रहेगा और अपने आसपास भी स्वस्थ, सुरक्षित एवं संस्कारयुक्त उत्सव का वातावरण बनाने में सहयोग करेगा।
आइए, इस दीपावली एक नया संकल्प लें
हम दीप जलाएंगे, लेकिन किसी के घर का चिराग बुझने नहीं देंगे। हम खुशियां बांटेंगे, लेकिन जुए में धन गंवाकर किसी परिवार की खुशियां नहीं छीनेंगे। हम त्योहार मनाएंगे, लेकिन नशे को उत्सव का आधार नहीं बनने देंगे। हम दिखावे के बजाय सेवा, अपव्यय के बजाय सहयोग और स्वार्थ के बजाय सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता देंगे।
याद रखिए, दीपावली का प्रकाश तभी सार्थक है, जब वह हमारे व्यवहार और विचारों में भी दिखाई दे। जुए की बाजी और नशे की मस्ती कुछ समय का आकर्षण हो सकती है, लेकिन परिवार का प्रेम, सामाजिक सम्मान और संस्कार जीवनभर की पूंजी हैं।
इस दीपावली घरों के साथ अपने विचारों को भी रोशन करें। जुआ छोड़ें, नशे से दूर रहें और त्योहारों को उनकी वास्तविक सांस्कृतिक एवं मानवीय भावना के साथ मनाएं। यही एक स्वस्थ, सभ्य और संस्कारवान समाज की पहचान है।
IKV NEWS की अपील: दीपावली को जुए और नशे से मुक्त बनाएं। खुशियां बांटें, रिश्ते संवारें और समाज में सद्भाव का दीप जलाएं।
IKV NEWS | हमीरपुर
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