“बिजली विभाग की नई व्यवस्था पर सवाल: स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता परेशान”

SHARE:

प्रदेश में स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताजा मामला तब सामने आया जब एक उपभोक्ता के मोबाइल ऐप में बैलेंस पॉजिटिव दिख रहा था, लेकिन घर की बिजली पूरी तरह गुल हो गई। जांच करने पर विभाग ने बैलेंस निगेटिव बताया, जिससे उपभोक्ता और अधिक असमंजस में पड़ गया।

यह मामला IKV News के प्रधान संपादक सुशील सोनी के घर का है। उन्होंने बताया कि उनके घर पर अचानक बिजली कट गई, जबकि मीटर तक सप्लाई आ रही थी लेकिन घर के अंदर बिजली नहीं थी। जानकारी करने पर पता चला कि स्मार्ट मीटर से कट हो गया है भाई श्याम जी से पूँछा तो उन्होंने बताया की 17 अप्रैल को ₹1200 का रिचार्ज किया गया था, और एप में बैलेंस पोसिटिव दिख रहा है

इस पर संपादक जी ने विभाग से संपर्क किया तो पहले उनसे पूरी डिटेल मांगी गई। बाद में विभाग की ओर से बताया गया कि खाते में ₹622 का निगेटिव बैलेंस है। हैरानी की बात यह रही कि यह निगेटिव बैलेंस उपभोक्ता के इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल ऐप में कहीं भी नहीं दिख रहा था, जहां बैलेंस पॉजिटिव दर्शाया जा रहा था।

संपादक सुशील सोनी ने बताया कि उन्होंने SDO से लेकर XCN स्तर तक अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन समाधान में देरी होती रही। JE साहब से रिचार्ज कराने के लिए बोला १००० Rs के रिचार्ज के बाद भी 1 से 1.5 घंटे तक बिजली बहाल नहीं हुई। इस दौरान उपभोक्ता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी साफ दिखाई दे रही है। “ऐप में कुछ और दिखता है और असल में कुछ और हो रहा है। यह समझना मुश्किल हो गया है कि पैसे किस आधार पर कट रहे हैं और कब बैलेंस निगेटिव हो जाता है,” पता ही नहीं चलता

सोनी जी ने आगे कहा कि स्मार्ट मीटर कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर कई बार कॉल करने पर फ़ोन नहीं उठाया गया , इससे स्पष्ट है कि कंपनी उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान नहीं अपनी जेब की चिंता ज्यादा कर रहीं है, भुगतान करने के बाद भी घंटों तक बिजली न मिलना उपभोक्ताओं को ठगा हुआ महसूस करा रहा है। सरकार और विभाग दोनों को गंभीरता से विचार करना चाहिये।

प्रदेश के कई हिस्सों में स्मार्ट मीटर के खिलाफ लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं।

इस पूरे मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने और एक समिति बनाकर इसकी जांच कराने की बात कही है।

निष्कर्ष:
स्मार्ट मीटर व्यवस्था जहां एक ओर बिजली प्रबंधन को आधुनिक बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर यह उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। जब तक इसमें पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक ऐसी समस्याएं जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

IKV News
Author: IKV News