हमीरपुर। जनपद हमीरपुर में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (NH-34) पर सड़क चौड़ीकरण व डिवाइडर निर्माण की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंचे प्रदर्शनकारियों पर अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। पुलिस ने भाजपा जिला उपाध्यक्ष शिवेन्द्र सिंह शिवाजी सहित 16 नामजद एवं 35-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। वहीं आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न करना नहीं, बल्कि सड़क हादसों में हो रही जनहानि को रोकने के लिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना था।
पुलिस अभिलेखों के अनुसार, 21 मई 2026 को कलेक्ट्रेट परिसर, हमीरपुर में प्रदर्शन एवं नारेबाजी की घटना को लेकर 24 मई 2026 को कोतवाली नगर थाना में एफआईआर संख्या 0097/2026 दर्ज की गई। शिकायत राजस्व निरीक्षक अशोक कुमार निगम की ओर से दी गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों ने बिना पूर्व अनुमति के कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर नारेबाजी की तथा प्रशासनिक कार्य में बाधा उत्पन्न की।
एफआईआर में आरोप है कि जनपद में लागू निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शन किया गया। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि 13 अप्रैल 2026 से 10 जून 2026 तक लागू आदेशों के अंतर्गत सार्वजनिक प्रदर्शन अथवा जुलूस के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक थी, लेकिन संबंधित लोगों द्वारा अनुमति नहीं ली गई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रदर्शन के दौरान उत्तेजक नारेबाजी की गई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ।
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2), 221 और 223 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में 16 नामजद लोगों के साथ 35-40 अज्ञात पुरुष एवं महिलाओं को भी आरोपी बनाया गया है।
हालांकि, आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह जनहित और सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर आधारित था। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (NH-34) पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है और स्थानीय जनता लंबे समय से सड़क चौड़ीकरण तथा डिवाइडर निर्माण की मांग कर रही है। उनका कहना है कि ज्ञापन के माध्यम से वे प्रशासन को समस्या की गंभीरता से अवगत कराना चाहते थे ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं पर रोक लग सके।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि NH-34 के कई हिस्सों में पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध नहीं होने, बढ़ते यातायात दबाव तथा डिवाइडर की कमी के चलते दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ऐसे में सड़क सुरक्षा को लेकर उठाई गई आवाज पर मुकदमा दर्ज होना अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सड़क सुरक्षा की मांग और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।







