दिव्यांगजनों को सम्मानपूर्वक जनसुनवाई कक्ष तक पहुंचाने के निर्देश, लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
संग्राम सिंह की शिकायत पर डीएम ने थाना प्रभारी से की बात, त्वरित एवं न्यायसंगत कार्रवाई के निर्देश
हमीरपुर। कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी श्री अशोक कुमार ने दूर-दराज से आए फरियादियों की समस्याएं गंभीरतापूर्वक सुनीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक पीड़ित को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है और शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनसुनवाई के दौरान दिव्यांगजनों की सुगमता एवं सम्मानजनक पहुंच को विशेष प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि किसी भी दिव्यांग फरियादी को जनसुनवाई में आने के लिए रेंगने अथवा असुविधाजनक स्थिति का सामना न करना पड़े। इसके लिए कलेक्ट्रेट के प्रवेश द्वार से ही पर्याप्त व्हीलचेयर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर के माध्यम से सम्मानपूर्वक जनसुनवाई कक्ष तक पहुंचाएं।
इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कराने की जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर श्री पैगाम हैदर को सौंपी गई। जिलाधिकारी ने कहा कि दिव्यांगजनों को जनसुनवाई में किसी भी प्रकार की असुविधा होना गंभीर विषय है। भविष्य में ऐसी स्थिति सामने आने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही निर्धारित करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संग्राम सिंह की शिकायत पर तत्काल संज्ञान
जनसुनवाई के दौरान शीतलपुर निवासी दिव्यांग फरियादी श्री संग्राम सिंह की शिकायत पर जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने थाना प्रभारी हमीरपुर से दूरभाष पर वार्ता कर प्रकरण में न्यायसंगत एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई केवल शिकायतें सुनने तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक फरियादी को उसकी समस्या के समाधान का भरोसा भी मिले। विशेषकर दिव्यांग, वृद्ध एवं जरूरतमंद व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उनकी समस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए।
उन्होंने कहा कि आमजन को सुगम, संवेदनशील एवं जवाबदेह प्रशासन उपलब्ध कराना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। जनसुनवाई में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।








