“स्टाम्प शुल्क में हेराफेरी का मामला”
“अधमूल्यांकन का संगठित खेल, सरकारी खजाने पर खुली डकैती!”
“गलती नहीं, गेम था—जमीन की कीमत के साथ खेल था!”
“सवाल सीधे उप-निबंधक पर!”
“उप-निबंधक की भूमिका पर गंभीर सवाल!”
(नितेन्द्र झां)
#महोबा। जिले में जमीन की रजिस्ट्री में कम स्टाम्प शुल्क जमा कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले में जिलाधिकारी ने कड़ा निर्णय दिया है। भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की धारा 47-क के तहत सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी/कलेक्टर स्टाम्प ने विक्रेता-क्रेता द्वारा कराई गई भूमि रजिस्ट्री में कम मूल्यांकन पाए जाने पर अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क और पेनल्टी की वसूली के आदेश जारी किए हैं।
मामला सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम मामना से जुड़ा है, जहां गाटा संख्या 70/1/2 व 45/2 की कृषि भूमि का विक्रय विलेख 5 जनवरी 2024 को पंजीकृत कराया गया था। जांच के दौरान पाया गया कि भूमि नगर पालिका परिषद महोबा की सीमा से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है और बाजार मूल्य निर्धारण सूची के अनुसार इसका मूल्यांकन अधिक बनता है।
प्रशासनिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि विक्रय विलेख में जमीन का मूल्य कम दर्शाकर स्टाम्प शुल्क कम अदा किया गया था। जबकि मूल्यांकन सूची के अनुसार भूमि का बाजार मूल्य करीब 1 करोड़ 2 लाख 70 हजार रुपये आंका गया। इसके आधार पर देय स्टाम्प शुल्क 7,08,900 रुपये और निबंधन शुल्क 1,02,700 रुपये बनता था।
जांच में पाया गया कि क्रेता द्वारा स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क कम जमा किया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने आदेश देते हुए 4,56,800 रुपये का अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क तथा 1,15,000 रुपये की पेनल्टी वसूलने का निर्देश दिया है। इस प्रकार कुल 5,71,800 रुपये की वसूली की जाएगी। साथ ही देय राशि पर निर्धारित अवधि तक ब्याज भी वसूला जाएगा।
जिलाधिकारी गजल भारद्वाज द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में राशि जमा न होने पर वसूली की कार्रवाई राजस्व बकाया की तरह की जाएगी।
इस आदेश के बाद जमीन की रजिस्ट्री में कम मूल्यांकन कर राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्रशासन की सख्ती का संदेश गया है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।







