सिंचाई प्रखंड के नाला सफाई का भौतिक सत्यापन हो तो बड़ा भ्रष्टाचार हो सकता है उजागर
महोबा। जनपद में सिंचाई विभाग की नाला सफाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि विभाग द्वारा कागजों में लंबी दूरी की नाला सफाई दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कबरई विकास खंड के पहरा गांव में करीब 6 किलोमीटर लंबे नाले की सफाई का कार्य दर्शाया गया है, लेकिन मौके पर महज करीब 300 मीटर तक ही सफाई दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बाकी नाले की सफाई का भुगतान किस आधार पर किया गया।
सूत्रों का दावा है कि इससे पहले भी वर्ष 2025 में लगभग 7 किलोमीटर नाला सफाई के नाम पर केवल करीब 2 किलोमीटर तक ही कार्य कराया गया था। आरोप है कि शेष राशि का बंदरबांट कर लिया गया। अब 2026 में भी उसी तरह की अनियमितताओं की चर्चा तेज हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो नाला सफाई के नाम पर हुए कथित खेल की परतें खुल सकती हैं। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी खेतों तक पानी पहुंचाने के बजाय “पानी की तरह सरकारी पैसा बहाने” में लगे हैं।
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया है। जवाब मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। वहीं, क्षेत्रीय लोगों ने शासन से पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषी अधिकारियों और जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।







