लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम को लेकर प्रशासन अलर्ट, प्रभावित क्षेत्रों में तेज होगा रिंग वैक्सीनेशन

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सीडीओ ने विभागीय अधिकारियों को दिए समन्वित अभियान के निर्देश, पशुपालकों को लक्षणों की पहचान और बचाव के प्रति किया जागरूक

हमीरपुर। जनपद में गौवंश को लम्पी स्किन डिजीज (LSD) के संक्रमण से बचाने और इसके प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन ने रोकथाम अभियान तेज कर दिया है। चित्रकूटधाम मंडल, बांदा के आयुक्त एवं शासन के निर्देशों के क्रम में मुख्य विकास अधिकारी श्री अरुण कुमार सिंह ने विकास खंड, ग्राम विकास, पंचायती राज एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सीडीओ ने प्रभावित गौवंश के आसपास सघन रिंग वैक्सीनेशन कराने तथा विकास खंड स्तर पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं गोशाला संचालकों के साथ जनजागरूकता बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। टीकाकरण अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पैरावेट, पशु मित्रों और एसआरएलएम के अंतर्गत प्रशिक्षित पशु सखियों को आवश्यक प्रशिक्षण देकर अभियान में सहयोग लिया जा रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सभी प्रकार के अवकाश, अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर, निरस्त किए गए हैं।

तेज बुखार और शरीर पर गांठें प्रमुख लक्षण

मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह यादव ने बताया कि लम्पी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित संक्रामक रोग है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, आंख एवं नाक से पानी गिरना, पैरों एवं गल-कम्बल में सूजन तथा शरीर पर कठोर एवं चपटी गांठों का उभरना शामिल है। इसके अलावा गाभिन पशुओं में गर्भपात, दुधारू पशुओं में दुग्ध उत्पादन में कमी, वजन घटना और कमजोरी भी देखी जा सकती है।

उन्होंने बताया कि संक्रमण बीमार पशु के लार, नासिका स्राव, दूध एवं वीर्य के माध्यम से फैल सकता है। संक्रमित पशु के सीधे संपर्क के अलावा संदूषित चारा-पानी तथा मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के माध्यम से भी इसके फैलने की संभावना रहती है।

लक्षण दिखें तो पशु को तत्काल अलग करें

पशुपालकों से अपील की गई है कि किसी पशु में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी अथवा पशुधन प्रसार अधिकारी को सूचना दें। प्रभावित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही उपचार कराएं।

पशुबाड़े एवं आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई बनाए रखने के साथ आवश्यकतानुसार कीटाणुनाशक का प्रयोग करने तथा पशुओं को मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे कीटों से बचाने के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

सामूहिक चराई और पशु मेले से बचने की अपील

प्रकोप की स्थिति में पशुपालकों को पशुओं को सामूहिक चराई के लिए भेजने से बचने तथा पशु मेला, प्रदर्शनी एवं हाट-बाजार में पशुओं को ले जाने से परहेज करने की सलाह दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों से नए पशुओं की खरीद-बिक्री न करने और पशुओं को पानी पिलाने के लिए सार्वजनिक जलस्रोतों के उपयोग से बचने की अपील की गई है।

किसी पशु की मृत्यु होने पर शव को खुले में न छोड़कर वैज्ञानिक विधि से गहरे गड्ढे में दफनाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

प्रशासन एवं पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। बीमारी के लक्षण अथवा उपचार से संबंधित जानकारी के लिए पशुपालन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। समय पर सूचना, सावधानी और टीकाकरण अभियान में सहयोग से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

IKV News
Author: IKV News

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