हमीरपुर में पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

SHARE:

AI Generated

जिलाधिकारी ने किसानों से की फसल अवशेष न जलाने की अपील, दो एकड़ से कम भूमि पर पराली जलाने पर ₹5,000 तक का जुर्माना

कृषि यंत्रों पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान, पराली प्रबंधन के लिए निःशुल्क बायो-डिकम्पोजर की सुविधा

हमीरपुर। खरीफ फसलों एवं गन्ने की कटाई के दौरान खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जनपद में पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है। जिलाधिकारी श्री अशोक कुमार ने समस्त किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को किसी भी दशा में न जलाएं तथा उनके उचित प्रबंधन के लिए उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता, जैविक तत्वों और मित्र कीटों को नुकसान पहुंचता है। इससे भूमि की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के साथ ही पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) एवं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों के अनुपालन में पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। सुपर सीडर, पैडी स्ट्रा चॉपर एवं बेलर जैसे कृषि यंत्र बाजार दर से 20 प्रतिशत कम किराए पर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, पराली को शीघ्र सड़ाकर जैविक खाद में परिवर्तित करने के लिए किसानों को निःशुल्क बायो-डिकम्पोजर वितरित किए जा रहे हैं। ‘पराली दो-खाद लो’ योजना के अंतर्गत गौशालाओं में दो ट्राली पराली उपलब्ध कराने पर किसानों को एक ट्राली जैविक खाद दिए जाने की व्यवस्था की गई है।

कम्बाइन हार्वेस्टर में सुपर SMS अनिवार्य

जिलाधिकारी ने बताया कि कम्बाइन हार्वेस्टर से फसल कटाई के दौरान सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (Super SMS) अथवा पराली प्रबंधन के अन्य उपयुक्त यंत्र का प्रयोग अनिवार्य है। बिना आवश्यक यंत्र के फसल कटाई करते पाए जाने पर कम्बाइन हार्वेस्टर को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। मशीन को नियमानुसार उसके मालिक के खर्च पर ही छोड़ा जाएगा।

सैटेलाइट से होगी निगरानी, लगेगा पर्यावरणीय जुर्माना

पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तहसील एवं विकासखंड स्तर पर सचल निगरानी दस्तों का गठन किया गया है। सैटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की घटना की सूचना प्राप्त होते ही संबंधित के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार पराली जलाने वाले किसानों से निर्धारित दरों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूल की जाएगी। इसके तहत दो एकड़ से कम भूमि पर पराली जलाने पर ₹5,000, दो से पांच एकड़ तक ₹10,000 तथा पांच एकड़ से अधिक भूमि पर ₹30,000 तक की क्षतिपूर्ति वसूल किए जाने का प्रावधान है।

जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने के बजाय उसे गौशालाओं में उपलब्ध कराएं अथवा जैविक खाद के रूप में उपयोग करें। उन्होंने कहा कि पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और कृषि उत्पादकता बनाए रखने में भी सहायक है। सभी किसान पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

IKV News
Author: IKV News

सबसे ज्यादा पढ़ी गयीं