मंगलगढ़ किले में धरोहर पर डाका! अष्टधातु की ऐतिहासिक तोप काटता चोर रंगे हाथ गिरफ्तार

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(नितेन्द्र झां)

#महोबा। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहर मंगलगढ़ किला एक बार फिर असामाजिक तत्वों के निशाने पर आ गया। रियासत काल की अष्टधातु से बनी ऐतिहासिक तोप को काटकर बेचने की साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। नगर पालिका कर्मचारियों की सतर्कता से आरोपी को किले के भीतर ही रंगे हाथों दबोच लिया गया।
बताया गया कि आरोपी कई दिनों से किले में छिपकर आरी ब्लेड से ऐतिहासिक तोप को काट रहा था। वह तोप को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर बाहर तस्करी करने की फिराक में था। मंगलवार को किले में तैनात कर्मचारियों को धातु कटने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद नगर पालिका टीम को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही नगर पालिका के लिपिक संजीत कुमार, कर्मचारी अनिल समेत अन्य लोग मौके पर पहुंचे। वहां एक युवक भारी-भरकम तोप को आरी ब्लेड से काटता मिला। जांच में सामने आया कि तोप का एक हिस्सा पहले ही काटा जा चुका था। टीम ने तत्काल घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान मौके से तोप काटने के औजार, ब्लेड का बंडल और आधार कार्ड बरामद हुआ।
पकड़े गए आरोपी की पहचान रजनीकांत मिश्र पुत्र विवेकानंद मिश्र निवासी खैरखुटा, गोरखपुर के रूप में हुई। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह कई दिनों से किले में छिपा था। दिन में रेकी करता और रात में तोप काटने का काम करता था। पुलिस को आशंका है कि इस पूरे मामले के पीछे कोई बड़ा कबाड़ या धरोहर तस्कर गिरोह भी सक्रिय हो सकता है।
नगर पालिका लिपिक संजीत कुमार की तहरीर पर चरखारी कोतवाली में आरोपी के खिलाफ चोरी, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और प्राचीन स्मारक अधिनियम समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपी का आपराधिक इतिहास खंगालने के साथ उसके संभावित साथियों की तलाश में जुट गई है।
नगर पालिका कर्मचारियों की मुस्तैदी से करोड़ों रुपये मूल्य की ऐतिहासिक धरोहर को बचा लिया गया। हालांकि घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं आखिर आरोपी कई दिनों तक किले में छिपा कैसे रहा, और ऐतिहासिक धरोहरों की निगरानी कितनी मजबूत है?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।

Nitendra Jha
Author: Nitendra Jha